अज़नबी था
जब तुमसे पहली बार मिला था...
बातों-मुलाकातों का दौर
फिर तुम संग बढ़ चला था...
तुमसे मिले बगैर
मेरा ना कोई दिन ढला था...
हाथ तुम्हारा थामे
मैं हर एक कदम चला था...
तुम्हें संजोकर आँखों में
मेरा तो हर ख़्वाब पला था...
साथ हमेशा दोगी
यही तुमने हर दिन कहा था...
तुम चुप थी उस दिन
पर वो आँखों में क्या था...
बहने को था आतुर
पर अधरों में अटका था...
ख़त थमा कर हाथों में
मुझसे जैसे वक्त मुड़ा था...
तुम्हारी ज़ुल्फ़ों का आँचल
मुझ पर आखिरी बार उड़ा था...
टूटा था खुद में मैं पूरा
उम्र भर फिर ना जुड़ा था...
#व्याकुल
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