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Saturday, 21 October 2017

दीपावली

आओ मिल के लगाएँ पंक्तियाँ
हम उन दियों की, 
स्नेह-आशीष हों समेटे 
जो अपने प्रियों की, 
नहीं दरकार है हमें 
राजनैतिक जुमलुओं की, 
वैमनस्य के अंधेरे को करे दूर
लहर चले ऐसे जुगनुओं की, 
भूखे पेट में देने को निवाले 
बहे ना धार आंसुओं की, 
भेंट गरीबी के ना चढ़े 
नन्हीं आरजूओं की, 
प्रगति पथ पर बढ़ने में ना 
हो कमी रोशनियों की, 
तभी होगी संपन्न सबकी 
दीपावली खुशियों की |

#व्याकुल 

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