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Sunday, 26 March 2017

विश्व कविता दिवस

लेखनी जात-पात ना जाने
मानवता को सर्वोपरि माने,


थमी जिनके हाथ वे नहीं सयाने
वे तो बस हैं भाव के दीवाने,


कभी तो लिखने पर पाएँ ताने
कभी बन जाएँ उनके फ़साने,


ग़ज़ल सुने कोई दिल बहलाने
पढ़े कविता कोई मुस्कुराने,


कहानी बुनने के आए ज़माने
होठों पे गूंजेंगे अब नए तराने,


सृजनता के नए आयाम गर हों आजमाने
आओ थामें वो दामन जो है 'आज सिरहाने'

#विश्व कविता दिवस #२१ मार्च २०१७
#
व्याकुल

2 comments:

  1. Beautifully expressed sentiment that " art has no boundaries"! Well done Kavi!

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