दिल में तेरी
मुहब्बत ऐसे दर्ज है
दौड़े रग़ों में बनकर जैसे मर्ज है।
दौड़े रग़ों में बनकर जैसे मर्ज है।
झूम रहा हूँ
जिसमें होकर सराबोर
जुनूं कि मिरे इश्क की ऐसी तर्ज है।
जुनूं कि मिरे इश्क की ऐसी तर्ज है।
वजूद इस जहाँ
में तुझसे ही पाया
ना चुका सकूँगा जो तेरा कर्ज है।
ना चुका सकूँगा जो तेरा कर्ज है।
खुशनसीब हूँ
तिरी निगरानी में जिया
अदा कर जाऊँगा जो मिरा फर्ज है।
अदा कर जाऊँगा जो मिरा फर्ज है।
हँसते हुए जान दे दूँ कैसा हर्ज है।
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