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Sunday, 26 March 2017

मिसाल

जो मुझे दिखता है
वही लिखता हूँ
कुछ आपको दिखाता हूँ
सभागार ले चलता हूँ..1




संचालक के रूप में
मैंने कमान हाथ में ली
विषय स्पष्ट करने को
फिर चर्चा आरंभ की..3




डॉक्टर सबसे पहले आए
बोले अब क्या हम फरमाए
ईलाज सबका कर देते हैं
फला तो फीस ले लेते हैं..5




मंच था सजा हुआ
मजमा सा लगा हुआ
कोहनी मसनद पे टेके थे
कुछ बुद्धिजीवी बैठे थे..2




मंच पर उपस्थित महोदय
अपना अनुभव साझा करें
समाज हेतू की गई
कोई मिसाल पेश करें..4






शिक्षक बोले हाल बुरा है
शिष्यों का स्तर गिरा है
सभी निःशुल्क पढ़ते हैं
उत्तीर्ण होने पे फीस देते हैं..6
वकील साहब हताश हैं
करीबी उनके बदमाश हैं
पैरवी उनसे ही करवाते हैं
हारने पर धमकाते हैं..7




अंत में समाजसेवी आए
सबके अनुभव से हर्षाए
बोले मिसाल नहीं देनी है
एक ही बात कहनी है..9




बहिष्कृत होते आ रहे
अब बदलाव ला रहे
स्वयं को सिद्ध कर रहे
मुख्य धारा से जुड़ रहे..11





खोखली उपलब्धियाँ रचते हैं
हम स्वयं को छलते हैं
विषमताओं में जो पलते हैं
वही मिसाल बनते हैं..13

#मबुंई #२१ जनवरी २०१७
#व्याकुल




अब बारी नेताजी की आई
दुःख से थी आँख डबडबाई
वोटर पैसे उनसे लेता है
वोट विरोधी को देता है..8




एक वर्ग जो हमसे संबद्ध है
अभिशप्त उनका प्रारब्ध है
सबका तिरस्कार सहते हैं
किन्नर सब उन्हें कहते हैं..10




हमारी तरह इंसान हैं
वे भी ईश्वर की संतान हैं
उनकी समृद्धि चाहता हूँ
वार्षिक अनुष्ठान करवाता हूँ..12







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