तेरी यादों में इस कदर बिखरा
चाह कर भी सँवर नहीं पाता।
कर ना सका
तिजारत इश़्क की
ज़बान देकर मुकर नहीं पाता।
ज़बान देकर मुकर नहीं पाता।
दिल परिंदे सा
कब तलक उड़े
क्यों ज़मीं पे शजर नहीं पाता।
क्यों ज़मीं पे शजर नहीं पाता।
क़ाफिर बन गया
तिरे इश्क में
अब दुआ में असर नहीं पाता।
अब दुआ में असर नहीं पाता।
जुदाई में तिरी
बेख़ुद हुआ
अब ख़ुशी की ख़बर नहीं पाता।
अब ख़ुशी की ख़बर नहीं पाता।
दिल मिरा खिला 'आज सिरहाने'
मुरझाता गर दर नहीं पाता।
मुरझाता गर दर नहीं पाता।
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