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Sunday, 26 March 2017

ख़्वाब

तुम्हे चाहना
और पाना भी
तुम्हे देखते हुए
सँवरना भी
तुम्हारे संग
पलों का
गुजरना भी
तुम्हारी उपेक्षा को
भूलना भी
तुमसे जुड़कर
टूटना भी
तुम्हे पाकर
बिखरना भी
तुम्हे तुमसे
चुराना भी
तुम्हारे संग
जीना और
मर जाना भी।

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