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Sunday, 26 March 2017

नया साल

आने को नया साल है
चारों ओर धमाल है
जोश में उबाल है
बदली सबकी चाल है
उठता एक सवाल है
क्या हर कोई खुशहाल है?







भ्रष्ट ने बुना जाल है
रोज़ हुआ मालामाल है
नेतागिरी एक टकसाल है
ख़ुद में एक कमाल है
ईमानदार ही कंगाल है
क्या यही नया साल है?











#मुंबई #३१ दिसंबर २०१६
#व्याकुल







कीमतों मे उछाल है
फसल खस्ता हाल है
किसान हुआ निढाल है
कर्ज़े से बेहाल है
जीना हुआ मुहाल है
कैसा ये नया साल है?







बदल रहा काल है
सोच में भाल है
बिखरी हुई ताल है
सब लगे जंजाल है
ये मंज़र फ़िलहाल है
ज़िंदगी का यही जमाल है
समझ ले किसकी मजाल है
जीवन हर पल नया साल है।

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