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Thursday, 21 July 2016

साथी

अठ्ठारह बरस पहले प्यार की दो कलियाँ थी खिलीं
सबके चहेते हमारे रजत को प्यारी भावना थी मिली
उमंग भरे प्रफुल्लित मन से कह उठा था ये रजत
आज से पहले आज से ज्यादा खुशी आज तक नहीं मिली।

थे कभी जो अजनबी आज बन गए थे हमजोली
छेड़ने-सताने रूठने-मनाने की शुरु हो गई आँख-मिचोली
प्यार के मीठे अहसास के संग सपने होने लगे सुहाने
साया साथी का साथ सदा ही पाया जब भी सपनों से आँखें खोलीं।

प्यार भरा यह छोटा सा सफ़र कारवाँ बनता गया
रंग और खुशी भरा फूल प्यारी बगिया में जुड़ता गया
नंदिनी के रूप में सलोनी बिटिया की सौग़ात मिली
जुड़कर खुश ने परिवार में झोली खुशीयों से भरी।

रहो सदा खुश तुम दोनों दुःख से ना हो सामना
ईश्वर सदैव करें पूरी तुम्हारी हर मनो कामना
प्यार-विश्वास एक दूजे का ना खोना सिर्फ पाना
रहे समृद्ध-संपन्न-सकुशल रजत की हर भावना।

© 24th November 2015 Sushil Kumar Sharma
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