जो छू ले आसमां को वो उड़ान अभी बाकी है
जिंदगी के कई अभी इम्तिहान बाकी हैं।
जिंदगी के कई अभी इम्तिहान बाकी हैं।
छेड़ दे दिलों के तार वो साज़ बजना बाकी है
मिटा दे दिलों के फासले वो सफर अभी बाकी है।
मिटा दे दिलों के फासले वो सफर अभी बाकी है।
सुलझा दे हर एक डोर वो गाँठ खुलना बाकी है
बना दे कली को फूल वो भँवरा आना बाकी है।
बना दे कली को फूल वो भँवरा आना बाकी है।
रोते बच्चे को सुला दे वो लोरी सुनाना बाकी है
भर दे जो पेट हर बच्चे का वो रोटी सिकना बाकी है।
भर दे जो पेट हर बच्चे का वो रोटी सिकना बाकी है।
कर दे दूर हर अंधेरे को वो सूरज उगना बाकी है
बुझा दे हर शमां को वो परवाना आना बाकी है।
बुझा दे हर शमां को वो परवाना आना बाकी है।
जो ख्वाब देखता हूँ रात-दिन उसका मुकम्मल होना बाकी है
लगता है जैसे खुद से खुद की पहचान होना बाकी है।
लगता है जैसे खुद से खुद की पहचान होना बाकी है।
(कुछ सूझा, सो लिख दिया...३१ दिसंबर २०१४)
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