बाज़ार में मूरत रब की मिलती है
माँ में सूरत रब की दिखती है।
माँ में सूरत रब की दिखती है।
कड़ी मेहनत से सींचे जो जीवन भर
छाप उन संस्कारों की नहीं मिटती है।
छाप उन संस्कारों की नहीं मिटती है।
क्या है आज जिसका मोल नहीं लगता
माँ की अनमोल ममता नहीं बिकती है।
माँ की अनमोल ममता नहीं बिकती है।
दौलत और शोहरत आज है कल ना रहे
कमाई माँ की दुआ की कभी नहीं छिनती है।
कमाई माँ की दुआ की कभी नहीं छिनती है।
जीने मरने पर जोर चला कभी नहीं किसी का
हर जनम मेरी ही माँ मिले यही रब से विनती है।
हर जनम मेरी ही माँ मिले यही रब से विनती है।
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Very touching composition!
ReplyDeleteThanks Gita...
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