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Saturday, 7 May 2016

माँ दिवस २०१६

बाज़ार में मूरत रब की मिलती है
माँ में सूरत रब की दिखती है।

कड़ी मेहनत से सींचे जो जीवन भर
छाप उन संस्कारों की नहीं मिटती है।

क्या है आज जिसका मोल नहीं लगता
माँ की अनमोल ममता नहीं बिकती है।

दौलत और शोहरत आज है कल ना रहे
कमाई माँ की दुआ की कभी नहीं छिनती है।

जीने मरने पर जोर चला कभी नहीं किसी का
हर जनम मेरी ही माँ मिले यही रब से विनती है।

© 8th May 2016 Sushil Kumar Sharma 
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