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Sunday, 29 May 2016

सुरम्य की मुस्कान

समय के पहिए सरपट दौड़ पड़े थे
खुशियों को तो जैसे पंख लगे थे
साथ देने बड़े भाई शुभांकर का
सुरम्य तुम परिवार में जुड़े थे।

प्यारी सूरत भोली बातें
चमकती हुई वो गोल आँखें
लाड़ करते लड़ते झगड़ते
कटती थीं हम सबकी रातें।

पूरे हो रहे आज पंद्रह बरस
समय अब तक रहा सरस
आगामी जीवन की पगडंडी में
आड़े ना आए कोई तमस।

पहली बड़ी परिक्षा (१०वीं) अति निकट है
जो बिलकुल भी नहीं विकट है
जिसने जग में जीतना सीखा
वही वास्तव में असली जीवट है।

(हमारे प्यारे बेटे सुरम्य को उसकी १५वीं वर्षगाँठ पर खूब सारा आशिर्वाद, २० अक्टूबर २०१५)

© 20th October 2015 Sushil Kumar Sharma
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