बीस बरस पहले दिन वो आया था
जिसने हम सबको हर्षाया था
सुशील-निधी की छोटी सी बगिया में
शुभांकर नाम का फूल मुस्काया था।
जिसने हम सबको हर्षाया था
सुशील-निधी की छोटी सी बगिया में
शुभांकर नाम का फूल मुस्काया था।
खुशियों से घर-द्वार सजा था
बधाईयों का अंबार लगा था
दादा-दादी के चेहरों पर
गर्व और संतोष अपार था।
बधाईयों का अंबार लगा था
दादा-दादी के चेहरों पर
गर्व और संतोष अपार था।
आगमन तुम्हारा था महत्वपूर्ण
जिसने जीवन को बनाया अर्थपूर्ण
दादा-दादी और हमारी परवरिश ने
दिए तुम्हे संस्कार-सदगुण संपूर्ण।
जिसने जीवन को बनाया अर्थपूर्ण
दादा-दादी और हमारी परवरिश ने
दिए तुम्हे संस्कार-सदगुण संपूर्ण।
आगामी हर पल को आनंदमय बनाओ
अपनों के जीवन को सुखमय बनाओ
जीवन के हर संघर्ष-चुनौती पर
विजय पताका फहराते जाओ।
अपनों के जीवन को सुखमय बनाओ
जीवन के हर संघर्ष-चुनौती पर
विजय पताका फहराते जाओ।
(हमारे प्रिय बेटे शुभांकर को जन्म दिवस पर ढेरों स्नेहाशीष, १९ अक्टूबर २०१५)
© 19th
October 2015 Sushil Kumar Sharma
All
Rights Reserved
No comments:
Post a Comment