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Sunday, 29 May 2016

केवीजी गीत २०१५

खोई हुईं खुशियाँ पाने का
राज़ आज है जाना जी..जाना जी..जाना जी
लौट चलें बचपन की ओर
कहे ये अपना केवीजी..केवीजी..केवीजी।

आओ धरा को फिर से चूमें,
हाथ बढ़ा कर नभ को छू लें,
पानी पर तस्वीर बनाने से,
आज कोई ना रोके जी..रोके जी..रोके जी
कहे ये अपना केवीजी..केवीजी..केवीजी।

धूल लगे बस्ते को खोलें,
बंद क़िताब के पन्ने पलटें,
कूची को रंगों में मिलने से,
आज कोई ना टोके जी..टोके जी..टोके जी
कहे ये अपना केवीजी..केवीजी..केवीजी।

तीसरे पीरियड में टिफिन निपटा के,
रिसेस में कैंडी आइस क्रीम खाके,
फ्री पीरियड में क्रिकेट खेलने में,
आज कोई ना सोचे जी..सोचे जी..सोचे जी
कहे ये अपना केवीजी..केवीजी..केवीजी।

पुराने मित्रों से जमकर मिल लें,
थोड़ी उनसे शरारत कर लें,
वापिस बड़े हो जाने को,
आज कोई ना बोले जी..बोले जी..बोले जी
कहे ये अपना केवीजी..केवीजी..केवीजी।

(My very first song dedicated to mini Re-union of KVG held at Hyderabad post Dipawali 2015)

© 17th November 2015 Sushil Kumar Sharma
All Rights Reserved

3 comments:

  1. You have beautifully summed up the sentiments & emotions all of us experienced that day. 🙏

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  2. Yes Gita...though I was not there...tried my best to b there with my words....

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  3. भाई, ये क्या है जी, क्या है जी, क्या है जी ?
    के वी जी, के वी जी, के वी जी ???

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