Labels

Poem (52) Geet (1)

Monday, 9 May 2016

मकर संक्रांत २०१५

पर्व ये संक्रांंत का जिसका महत्व है विशेष
सूर्य करने जा रहा मकर राशि में प्रवेश।

दक्षिणायन से पलायन उत्तरायण में आगमन
बढ़ते दिवस ने कर दिया घटती निशा का मान मर्दन।

थाम कर हाथ डोर का पतंग ने बात हवा से कर ली
जैसे ऊँचे आकाश में कोशिश है नए आसमां छूने की।

पकी फसल, लहलहाते खेत खुशहाली का संदेश है
हर पर्व हर्षोल्लास से मनाता ऐसा भारत देश है।

(मकर संक्रांत के अवसर पर एक रचना, १४ जनवरी २०१५)

© 14th January 2015 Sushil Kumar Sharma
All Rights Reserved


No comments:

Post a Comment