पर्व ये संक्रांंत का जिसका महत्व है विशेष
सूर्य करने जा रहा मकर राशि में प्रवेश।
सूर्य करने जा रहा मकर राशि में प्रवेश।
दक्षिणायन से पलायन उत्तरायण में आगमन
बढ़ते दिवस ने कर दिया घटती निशा का मान मर्दन।
बढ़ते दिवस ने कर दिया घटती निशा का मान मर्दन।
थाम कर हाथ डोर का पतंग ने बात हवा से कर ली
जैसे ऊँचे आकाश में कोशिश है नए आसमां छूने की।
जैसे ऊँचे आकाश में कोशिश है नए आसमां छूने की।
पकी फसल, लहलहाते खेत खुशहाली का संदेश है
हर पर्व हर्षोल्लास से मनाता ऐसा भारत देश है।
हर पर्व हर्षोल्लास से मनाता ऐसा भारत देश है।
(मकर संक्रांत के अवसर पर एक रचना, १४ जनवरी २०१५)
© 14th January 2015 Sushil Kumar Sharma
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