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Monday, 9 May 2016

एक क़तरा

एक क़तरा हूँ कुछ तो है पहचान मेरी
खुद से बिछुड़ा तो समुन्दर हो जाऊंगा।

एक आँस हूँ मैं है मुझमें अभी साँस बाकी
छोड़ा जो हौसला एक पल में बिखर जाऊंगा।

एक जाम हूँ मैं मुझमे है अभी होश बाकी
छू लिया गर लबों से बेखुद हो जाऊंगा।

एक आँसू हूँ मुझमे है अभी जज़्बात बाकी
गिरा जो आँख से पत्थर ही हो जाऊंगा।

# १६ जनवरी २०१५
# व्याकुल

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