एक क़तरा हूँ कुछ तो है पहचान मेरी
खुद से बिछुड़ा तो समुन्दर हो जाऊंगा।
खुद से बिछुड़ा तो समुन्दर हो जाऊंगा।
एक आँस हूँ मैं है मुझमें अभी साँस बाकी
छोड़ा जो हौसला एक पल में बिखर जाऊंगा।
छोड़ा जो हौसला एक पल में बिखर जाऊंगा।
एक जाम हूँ मैं मुझमे है अभी होश बाकी
छू लिया गर लबों से बेखुद हो जाऊंगा।
छू लिया गर लबों से बेखुद हो जाऊंगा।
एक आँसू हूँ मुझमे है अभी जज़्बात बाकी
गिरा जो आँख से पत्थर ही हो जाऊंगा।
गिरा जो आँख से पत्थर ही हो जाऊंगा।
# १६ जनवरी २०१५
# व्याकुल
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