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Saturday, 14 May 2016

माँ

पूछे कोई क्या है कुदरत का सबसे बड़ा करिश्मा,
दोनों हाथों से नमन करूँ और कहूँ वो है माँ।

क्षितिज पे मिलन का हो आभास पर ना मिलें धरती-आसमां,
जिनके सिर हो माँ का साया हासिल उन्हें दोनों जहाँ।

कहते हैं महफूज़ उसे हो खुदा जिसका निगेहबाँ,
खुदा को देखा नहीं पर मेरा खुदा है मेरी माँ।

बच्चों की जीवन आकृतियों में रंग भरा करती है माँ,
इंसान के बदरंग कृत्यों को सहे चुपचाप धरती माँ।

(माँ दिवस २०१५ पर समस्त माँओं को मेरा नमन...)

© 10th May 2015 Sushil Kumar Sharma
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