पूछे कोई क्या है कुदरत का सबसे बड़ा करिश्मा,
दोनों हाथों से नमन करूँ और कहूँ वो है माँ।
दोनों हाथों से नमन करूँ और कहूँ वो है माँ।
क्षितिज पे मिलन का हो आभास पर ना मिलें धरती-आसमां,
जिनके सिर हो माँ का साया हासिल उन्हें दोनों जहाँ।
जिनके सिर हो माँ का साया हासिल उन्हें दोनों जहाँ।
कहते हैं महफूज़ उसे हो खुदा जिसका निगेहबाँ,
खुदा को देखा नहीं पर मेरा खुदा है मेरी माँ।
खुदा को देखा नहीं पर मेरा खुदा है मेरी माँ।
बच्चों की जीवन आकृतियों में रंग भरा करती है माँ,
इंसान के बदरंग कृत्यों को सहे चुपचाप धरती माँ।
इंसान के बदरंग कृत्यों को सहे चुपचाप धरती माँ।
(माँ दिवस २०१५ पर समस्त माँओं को मेरा नमन...)
© 10th May 2015 Sushil Kumar Sharma
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u r gr8...very nice.
ReplyDeletevery nice
ReplyDeleteThanks for liking Rakesh bhai...
ReplyDeletevery nice Sharmaji......
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteNice One Sir....
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteExcellent. Keep it up
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