रिश्ता ये देखो बचपन का
कितना पावन अपना सा
साक्षी साथ बीते पलों का
एक बंधन सच्चा सा।
कितना पावन अपना सा
साक्षी साथ बीते पलों का
एक बंधन सच्चा सा।
जिसे मिला वो खुशनसीब
जिसे ना मिला वो गरीब सा
रिश्तों की झूठी भीड़ में
एक बंधन सच्चा सा।
जिसे ना मिला वो गरीब सा
रिश्तों की झूठी भीड़ में
एक बंधन सच्चा सा।
धागा डोर का कच्चा सा
रिश्ता मगर पक्का सा
खोकर सब कुछ पा सको गर
एक बंधन सच्चा सा।
रिश्ता मगर पक्का सा
खोकर सब कुछ पा सको गर
एक बंधन सच्चा सा।
समय की धूल से ढंकता सा
दूरियों की तपिश में तपता सा
बिन कहे सब कुछ कहता सा
एक बंधन सच्चा सा।
दूरियों की तपिश में तपता सा
बिन कहे सब कुछ कहता सा
एक बंधन सच्चा सा।
(रक्षा बंधन के शुभ अवसर स्व-रचित, २९ अगस्त २०१५)
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