बीते हुए लम्हों ने २०१५ का अतीत में विलय कर दिया
भोर की पहली किरण ने २०१६ का उदय कर दिया।
भोर की पहली किरण ने २०१६ का उदय कर दिया।
वही सुबह है, वही धूप है, वही शाम का मनोहर दृश्य है
समय नापते हुए कैलंडर ने बदला बस एक ही पृष्ठ है।
समय नापते हुए कैलंडर ने बदला बस एक ही पृष्ठ है।
आख़िर क्या बदला है ऐसा जो हमें रोमंचित कर रहा
संतोष और संयम का प्रश्न मुझे अचंभित कर रहा।
संतोष और संयम का प्रश्न मुझे अचंभित कर रहा।
सब कुछ पा लेने की होड़ में कोई सुखी नहीं दिखता है
मनचाहा मिल जाने पर भी क्यों बेसब्र सा फिरता है।
मनचाहा मिल जाने पर भी क्यों बेसब्र सा फिरता है।
सफलता-समृद्धि-संपन्नता की आख़िर क्या परिभाषा है
अथाह धन अर्जित कर लेना ही क्या मेरी अभिलाषा है।
अथाह धन अर्जित कर लेना ही क्या मेरी अभिलाषा है।
बेबसों की बदले त़कदीर, पथ से ना भटके राहगीर
खाली हाथों को मिले रोजी, भूखे पेट को मिल जाए रोटी।
खाली हाथों को मिले रोजी, भूखे पेट को मिल जाए रोटी।
हर सिर पर एक छत हो, हर शरीर को वस्त्र ढके हो
हर हाथ के साथ क़लम हो, इंसानियत ही सबका धर्म हो।
हर हाथ के साथ क़लम हो, इंसानियत ही सबका धर्म हो।
मायूस चेहरों पर लाएं मुस्कान और भर दें उत्साह हर्ष
तब बदलता कैलेंडर लाएगा सबके लिए शुभ नव वर्ष।
तब बदलता कैलेंडर लाएगा सबके लिए शुभ नव वर्ष।
(नव वर्ष २०१६ के शुभ आगमन पर एक स्व-रचित अभिव्यक्ति, ०२ जनवरी २०१६)
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