Labels

Poem (52) Geet (1)

Wednesday, 4 May 2016

दोस्ती

कुदरत की बख्शी हुई नायाब सौगात है दोस्ती,
दो अजनबियों को ले आती एक साथ है दोस्ती।

मिल जाए तो चंद लम्हों में इतनी सस्ती है दोस्ती,
ना हो त़कदीर में तो इक उम्र से भी महंगी है दोस्ती।

बंजर रेगिस्तान में पानी के चश्मे सी है दोस्ती,
उफनते समंदर में घिरी कश्ती की साहिल है दोस्ती।

जिंदगी गर है एक साज तो आवाज है दोस्ती,
दोस्त हैं परिंदे उनकी परवाज़ है दोस्ती।

मिल जाए एक सच्चा दोस्त तो पूरी क़ायनात है दोस्ती,
वरना तो इंसानों की इस भीड़ में तन्हा है दोस्ती।

पूछे कोई हमारे लिए क्या मायने रखती है दोस्ती,
दोस्त के साथ सुख-दुख बाँटती हुई मस्ती है दोस्ती।

© 2nd August 2015 Sushil Kumar Sharma
All Rights Reserved

No comments:

Post a Comment