समेटने को बिखरी यादें ना कोई कमी रखना
गर हो कभी उदास दिल आँख में नमी रखना।
गर हो कभी उदास दिल आँख में नमी रखना।
सफर में जिंदगी के नए मुकाम हो रहे हासिल
ठोकर पे बुलंदी पैरों के नीचे ज़मीं रखना।
हसरत में जिसे पाने की उम्र हो गई दराज़
दीदार हो जब उसका साँस थमी रखना।
दीदार हो जब उसका साँस थमी रखना।
बेवफाई में मुहब्बत की जश्न करना इस कदर
होठों पे ओढ़ के हँसी दिल में ग़मी रखना।
All Rights Reserved
No comments:
Post a Comment