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Wednesday, 4 May 2016

बिखरी यादें

समेटने को बिखरी यादें ना कोई कमी रखना
गर हो कभी उदास दिल आँख में नमी रखना।

सफर में जिंदगी के नए मुकाम हो रहे हासिल
ठोकर पे बुलंदी पैरों के नीचे ज़मीं रखना।

हसरत में जिसे पाने की उम्र हो गई दराज़
दीदार हो जब उसका साँस थमी रखना।

बेवफाई में मुहब्बत की जश्न करना इस कदर
होठों पे ओढ़ के हँसी दिल में ग़मी रखना।

© 27th April 2016 Sushil Kumar Sharma
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