दिल के रिश्ते भी कितने अजीब होते हैं
वही हो जाते हैं दूर जो करीब होते हैं।
वही हो जाते हैं दूर जो करीब होते हैं।
कमाते चलो हर शय से बस प्यार की दौलत
अक्सर धनवान ही रिश्तों से गरीब होते हैं।
मिला जो हमसफ़र तो लगा हो गए मुकम्मल
तन्हा करे जो बसर वो बड़े बदनसीब होते हैं।
संजोते चलो मुहब्बत से भरा हर इक लम्हा
चलें जब गर्दिश के थपेड़े तो बेतरतीब होते हैं।
इस बड़ी भीड़ में कहने को तो हैं तमाम अपने
सुना है शक्ल में दोस्ती की छिपे रक़ीब होते हैं।
© 19th April 2016 Sushil Kumar Sharma
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