देखनी हो जो
गहराई रिश्तों में
वो है दोस्ती में।
गहराई रिश्तों में
वो है दोस्ती में।
खोजना हो जो
सुकून बंदिगी में
मिले दोस्ती में।
सुकून बंदिगी में
मिले दोस्ती में।
नोंक-झोंक के
अटूट सिलसिले
निभे दोस्ती में।
अटूट सिलसिले
निभे दोस्ती में।
ऐतबार की
सताई हुईं मौजें
चलें दोस्ती में।
सताई हुईं मौजें
चलें दोस्ती में।
इंतज़ार से
बेजार हुईं रातें
कटें दोस्ती में।
बेजार हुईं रातें
कटें दोस्ती में।
#स्वलेख #हाइकू #मित्रता
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