कहती हूँ मैं...सुनो तुम
वैसे तो मैं
खुद में कुछ भी नहीं...
जो हाथ रंगे मुझे
उनसे जुदा भी नहीं...
खुद में कुछ भी नहीं...
जो हाथ रंगे मुझे
उनसे जुदा भी नहीं...
कब जन्मी, कब हुई बड़ी
यह ना जाना...
स्पर्श जिसने भी किया
अपना माना...
यह ना जाना...
स्पर्श जिसने भी किया
अपना माना...
चलुँ धरा पर, उड़ुँ हवा में
पानी में बहुँ...
बड़े चाव से सुनें सब
जब भी मैं कुछ कहूँ...
पानी में बहुँ...
बड़े चाव से सुनें सब
जब भी मैं कुछ कहूँ...
ना कोई दोस्त, ना है दुश्मन
रिश्ता सबसे गहरा...
ज़नाजे में भी हूँ शामिल
इतराऊँ जब बंधे सेहरा...
रिश्ता सबसे गहरा...
ज़नाजे में भी हूँ शामिल
इतराऊँ जब बंधे सेहरा...
बेटा सीमा की रक्षा में
माँ बेटे की प्रतीक्षा में
नयन बने दोनों के झील...
प्रीत दोनों की निरालीपहुँचाए संदेशे मीलों-मील....
माँ बेटे की प्रतीक्षा में
नयन बने दोनों के झील...
प्रीत दोनों की निरालीपहुँचाए संदेशे मीलों-मील....
अरमानों के पतझड़, उमंगों के बसंत
या फिर चाहतों की बारिश...
टूटते कई ख्वाब देखे
पूरी होती कईं ख्वाहिश...
या फिर चाहतों की बारिश...
टूटते कई ख्वाब देखे
पूरी होती कईं ख्वाहिश...
खोना क्या, पाना क्या
और क्या हँसना-रोना...
जीवन की आपा-धापी में देखा
खाली दिल का हर इक कोना...
और क्या हँसना-रोना...
जीवन की आपा-धापी में देखा
खाली दिल का हर इक कोना...
समय बीता, वक्त गुजरा
बदले मेरे मायने भी...
आज जो हाशिये पर है
जिंदा होती थी चिट्ठी भी कभी...
बदले मेरे मायने भी...
आज जो हाशिये पर है
जिंदा होती थी चिट्ठी भी कभी...
- स्वलेख, द्वारा सुशील शर्मा 'व्याकुल', मुंबई, ०६ अगस्त २०१६
© सर्वाधिकार सुरक्षित
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Very profound indeed. Best one to date.
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