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Wednesday, 11 May 2016

गणतंत्र दिवस २०१५

बीत गए पैंसठ बरस
बने हुए गणतंत्र को
राह किसकी देख रहे
अब तो हम स्वतंत्र हों।

दिवस यह गणतंत्र का
क्यों गणों का तंत्र है
कहने को है लोकतंत्र
क्या हम स्वतंत्र हैं।

कोई बना रहा है यंत्र
कोई दिखा रहा है मंत्र
कुरीतियों से अब भी परतंत्र
इनसे कब होंगे स्वतंत्र।

पड़ोसी रच रहा षडयंत्र
भ्रष्ट नेताओं का है कुतंत्र
अब तो आए गणों का तंत्र
तभी तो होगा देश स्वतंत्र।

(गणतंत्र दिवस २०१५ के उपलक्ष्य में राष्ट्र के समक्ष एक सोच, एक विचार...)

© 26th January 2015 Sushil Kumar Sharma
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