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Saturday, 14 May 2016

मेरी हमसफर

जब एक नज़र का दूजी से मिलना हुआ
दिल के गुलिस्तां में फूल का खिलना हुआ
बातों-मुलाकातों का दौर इस कदर बढ़ता गया
हमें अपना वेलेंटाइन अंततः मिल ही गया।

प्यार का मीठा अहसास दिलों में जगने लगा
मिलने-जुलने कि जज्बा भी जोर पकड़ने लगा
रहना अलग-अलग अब दुश्वार होने लगा
हाँ मुझे अपने वेलेंटाइन से अब प्यार होने लगा।

जिस घड़ी का था इंतज़ार वो अब आ ही गई
दो धड़कते दिलों की धड़कन एक डोर में बंध गई
आने वाली हर सुबह-शाम अब लगने लगी नई
हाँ मेरी वेलेंटाइन अब मेरी हमसफर हो गई।

समय का पहिया फिर तो सरपट दौड़ चला
हसीन दिलों का सफर कारवां की तरह बढ़ चला
खुशी-प्यार-विश्वास जीवन के पर्याय हैं
और ये सभी सार मेरी वेलेंटाइन में समाए हैं।

(वेलेंटाइन दिवस २०१५ पर मेरे हमसफर को मेरा एक उपहार)

© 14th February 2015 Sushil Kumar Sharma
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