मोह जो
तुम्हे मुझसे है
धधकता है
अंगारे सा
भीतर तुम्हारे
और मुझमें
चिंगारी सा
डरता हूँ
कहीं सुलगता
ना रहे मुझमें
आजीवन
और...
छोड़ दे मुझे
भस्म होने को
तुम्हे मुक्त
करने को।
तुम्हे मुझसे है
धधकता है
अंगारे सा
भीतर तुम्हारे
और मुझमें
चिंगारी सा
डरता हूँ
कहीं सुलगता
ना रहे मुझमें
आजीवन
और...
छोड़ दे मुझे
भस्म होने को
तुम्हे मुक्त
करने को।
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