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Poem (52) Geet (1)

Saturday, 14 May 2016

दास्तान-ए-कारवाँ

बात यह तीन दशक पुरानी है,
मुलाकात है नई पहचान पुरानी है;
दुनिया है कितनी छोटी बात आज ये जानी है,
बिखरी हुई कुछ यादों को मुठ्ठी में करने की ठानी है।

अलग प्रांत अलग परिवेष के साथियों से कुछ यूँ मिलना हुआ,
जैसे कि एक लघु भारत का दो पल में बनना हुआ;
नोंक झोंक मौज मस्ती के बीच नए मित्रों से जुङना हुआ,
जैसे कि जीवन की किताब में एक नए अध्याय का लिखना हुआ।   

सीरो का ज़ीरो समझना था मुश्किल, तोलु का भौतिक शास्त्र् था बङा जटिल,
काज़ी सर की इंगलिश सुभान अल्लाह, मलैया सर का इतिहास माशा अल्लाह;
दीक्षित मैडम का बेहतरीन व्याकरण, शिवन्ना सर का कङा अनुशासन,
सुबय्या सर का गणित इस कोण से उस कोण, 
शर्मा मैडम का भूगोल कभी नॉर्थ पोल तो कभी साउथ पोल।

शिक्षक सहपाठियों के संग समय सरपट भागता गया,
जलदी ही दसवी की परिक्षा का वक्त भी समीप आ गया;
करके जीत दर्ज इस पङाव में हम सब हर्षित हो गए,
कुछ साथी रह गए संग कुछ अपनी राह के हो गए।

अपने रुझान क्षमतानुरुप सबने ज्ञानर्जन किया,
जीवन में सुगम जीविका का मार्ग सबने पृशस्त किया;
कुछ ने देश की अस्मिता की सुरक्षा का भार अपने कंधों पे लिया,
कुछ ने विदेश में अपने योगदान से देश का नाम रोशन किया।

वक्त के बहते दरिया के संग हम सब भी बहते गए,
थामे हाथ हमराही का अपने-अपने जीवन में रमते गए,
जीवन के उतार-चढ़ाव में नए मुकाम पाते गए,
पुरानी यादों के साए में नए सपने सजाते गए।

समय ने फिर ली अंगङाई पुरानी यादों से जुङने की सुध अब आई,
भूले-बिसरे मित्रों से मिलने में फेसबुक बना करिश्माई;
एक-दूजे से जुङने का सिलसिला एक बरस तक चलता रहा,
तीन मास पहले वाह्ट्सयेप ने लंबी जुदाई को अलविदा कहा।

तीन दशक के बाद आज हम एक-दूजे के आमने-सामने हैं,
मुक्कमल इस ख्वाब को जिन्होंने किया वो सचमुच ही दीवाने हैं;
प्यार-विश्वास-बंधन-चाहत यही तो दोस्ती के पैमाने हैं,
आज कर रहे जो सफर शुरू हम एक दिन कारवाँ बन जाने हैं।

सुशील शर्मा
०४ जुलाई २०१५

(This composition is dedicated to Re-union of 10th standard students of KVG, Hyderabad held at Hyderabad on 4th July 2015...very close to my heart)

© 4th July 2015 Sushil Kumar Sharma
All Rights Reserved

1 comment:

  1. Lovely composition! Wish I was there to hear you recite it.

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